छत्रपती संभाजीनगर, 16 नवम्बर 2025: मूवमेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (MPJ) द्वारा आज यहाँ एक दिवसीय क्षमता-विकास कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, एक्टिविस्टों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को संगठन के आगामी राज्यव्यापी अभियान “जीवन का अधिकार, गरिमा के साथ” से परिचित कराना था।

यह अभियान 17 नवम्बर 2025 से शुरू होकर 11 जनवरी 2026 को यहीं वंदे मातरम् सभागृह में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के साथ समाप्त होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत महमूद खान के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने जीवन के अधिकार और मानव गरिमा के परस्पर संबंध पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात, अनीस मुहम्मद के निर्देशन में “जीवन का अधिकार, गरिमा के साथ” विषय पर एक Group Activity आयोजित की गई। इस सत्र में प्रतिभागियों को मौलिक अधिकारों के संदर्भ में जीवन के अधिकार की व्याख्या, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के व्यापक दायरे तथा इसके जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, पानी, निजता, स्वच्छ पर्यावरण और आजीविका जैसे पहलुओं से जोड़कर समझाया गया।

अगला सत्र तंज़ीम अंसारी द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के रूप में आयोजित किया गया, जिसका विषय था – ‘ज़मीनी हक़ीक़त: हाशिये के लोगों की आवाज़’। इस चर्चा में इस बात पर विमर्श हुआ कि कैसे जीवन का अधिकार आज भी दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिलाओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे समुदायों के लिए पूर्ण रूप से सुलभ नहीं है। ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इन अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की।

अभियान संयोजक अल्ताफ हुसैन ने ‘गरिमा के साथ जीवन का अधिकार’ अभियान का विस्तृत परिचय देते हुए इसके उद्देश्यों, विभिन्न गतिविधियों और राष्ट्रीय अधिवेशन तक की रणनीति पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी प्रतिभागियों ने 11 जनवरी 2026 को होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन को सफल बनाने के लिए District level कार्ययोजना तैयार की। इस योजना में जागरूकता अभियान, जन-संपर्क, परिवहन प्रबंधन, अभियान गतिविधियाँ और मीडिया रणनीति जैसे मुद्दों को विस्तार से शामिल किया गया।

कार्यक्रम का समापन मुहम्मद सिराज के प्रेरक वक्तव्य के साथ हुआ, जिन्होंने सभी प्रतिभागियों से इस जन-आंदोलन को मज़बूत करने और जीवन के अधिकार को हर नागरिक तक पहुँचाने का आग्रह किया।
यह एकदिवसीय कार्यशाला अभियान के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई और राज्य भर के कार्यकर्ताओं को एक साझा दृष्टि एवं कार्यनीति प्रदान की।
